हमारी संस्कृति
हिंदू धर्म की कुछ महत्वपूर्ण बातें जिसे आपको भी जानना चाहिए
• हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जो विश्व भर में सबसे बड़े धर्मों में से तीसरे स्थान पर आता है लेकिन इसी धर्म की 95 प्रतिशत जनसंख्या एक देश, एक राष्ट्र भार....
कन्या दान का महत्त्व
हिंदू धर्म में हर परंपरा का महत्व होता है। विवाह में वरमाला, फेरे, मंगलसूत्र आदि जैसी रस्में निभाई जाती हैं। लेकिन इन सबमें ए....
भगवान विष्णु के दस अवतार:- वराहावतार
अनन्त भगवान ने प्रलय के जल में डूबी हुई पृथ्वी का उद्धार करने के लिए वराह शरीर धारण किया। कहा जाता है कि एक दिन स्वायम्भुव मनु ने बड़ी नम्रता से हाथ ज....
हमारी संस्कृति में यज्ञ का महत्व
भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ और यज्ञ का बहुत महत्व है। यज्ञ उपासना के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। यज्ञ शब्द यज-धातु से सिद्ध होता है जिसका अर....
"हनुमान जी ने सुनी अंजलि की पुकार"
"हनुमान जी ने सुनी अंजलि की पुकार"
ऋषिनगर में केशवदत्त ब्राह्मण अपनी पत्नी अंजलि के साथ रहता था। केशवदत्त के घर में धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। ....
""रक्षाबंधन" से जुड़ी कहानियां"
"रक्षाबंधन" भाई - बहन के प्यार का त्योहार है, जो सदियों से चला आ रहा है। इतिहास में ऐसी बहुत सी कहानियां हैं जो ये साबित करती हैं कि हर युग में राखी क....
"मुश्किल कार्य को करें आसान गणपति"
एक बार भगवान शिव के मन में एक बड़े यज्ञ के अनुष्ठान का विचार आया। विचार आते ही वे शीघ्र यज्ञ प्रारंभ करने की तैयारियों में जुट गए। सारे गणों को यज्ञ अ....
"भाई दूज - किस समय करें भाई को टिका"

हिन्दू पंचांग के अनुसार भाई दूज का त्यौहार आज मनाया जा रहा है।

भाई दूज मुहूर्त 

भाई दूज के दिन तिलक लगाने का शुभ समय दिन में 0....

"तुलसी विवाह कैसे करें, व्रत कथा और पूजा विधि"

कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी यानी की देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी विवाह संपन्न किया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम के साथ ....

"देवी सरस्वती के हाथ में क्यों होती है वीणा"

हिन्दू धर्म में सभी देवी-देवताओं को विशिष्ट स्थानों से नवाजा गया है। इसी कड़ी में अगर देवी सरस्वती की बात करें तो उन्हें ज्ञान, पवित्रता और बुद्धि क....

"गुरुनानक जी की सीख - ईमानदारी से जीना चाहिए"

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु थे। जब गुरु नानक देव जी को ज्ञान की प्राप्ति हुई तब वे चार उदासियों पर निकले और एक बार ....

तुलसीदास को क्यों समझा ढोंगी

भारत में समय-समय पर धर्म, विज्ञान एवं साहित्य के क्षेत्र में महान विद्वानों और साहित्यकारों ने जन्म लिया है।....

"कैसे हुई भगवान गणेश की शादी"

जब भी गणेश  किसी अन्य देवता के विवाह में जाते थे तो उनके मन को बहुत ठेस पहुँचती थी। उन्हें ऐसा लगा कि अगर उनका विवाह नहीं हो पा रहा तो वे किसी....

श्रीराधिका जी का उद्धव को उपदेश

गोपियों के अद्भुत प्रेम - प्रवाह में ज्ञानशिरोमणि उद्धव का संपूर्ण ज्ञानभिमान बह गया । विवेक, वैराग्य, विचार, धर्म, नीति, योग, जप और ध्यान आदि....

देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओं का आविर्भाव

सूत जी ने कहा - भोजराज के स्वर्गारोहण के पश्चात् उनके वंश में सात राजा हुए, पर वे सभी अल्पायु, मंद बुद्धि और अल्पतेजस्वी हुए तथा तीन सौ वर्ष क....

जन्म - कर्म
भगवान के जन्म - कर्म की दिव्यता एक अलौकिक और रहस्यमय विषय है, इसके तत्त्व को वास्तव में तो भगवान ही जानते है अथवा यत्किंचित उनके वे भक्त जानते हैं, जि....
जानिए क्या है मानस-पूजा और कैसे करें भगवान शिव की मानसपूजा
शास्त्रों में पूजा को हजारगुना अधिक महत्वपूर्ण बनाने के लिए एक उपाय बतलाया गया है। वह उपाय है मानस-पूजा, जिसे पूजा से पहले करके फिर बाह्य वस्तुओं से प....
सत् - असत् का ज्ञान
सत् - असत् का विवेक मनुष्य अगर अपने शरीर पर करता है तो वह साधक होता है और संसार पर करता है तो विद्वान होता है । अपने को अलग रखते हुए संसार में सत् - अ....
परिवर्तन ही जीवन
शरीर कभी एकरूप रहता ही नहीं और सत्ता कभी अनेकरूप होती ही नहीं । शरीर जन्म से पहले भी नहीं था, मरने के बाद भी नहीं रहेगा तथा वर्तमान में भी वह प्रतिक्ष....
शिक्षाप्रद कहानियां- जल्दबाजी का फल‬
एक समय की बात है। गरीबी से परेशान एक युवक अपना जीवन समाप्त करने के लिए नदी पर गया, वहां युवक को एक साधु मिल गए उन्होंने उसे ऐसा करने के लिए मना कर दिय....
योग - वियोग
जिसके साथ हमारा संबंध है नहीं, हुआ नहीं, होगा नहीं और होना संभव ही नहीं, ऐसे दु:खस्वरूप संसार - शरीर के साथ संबंध मान लिया, यहीं ‘दु:खसंयोग’ है । यह द....
संत कबीरदास जंयती पर विशेष- कबीर दास की शिक्षा
एक ब्राह्मण हमेशा धर्म-कर्म में मग्न रहता था। उसने जीवनभर पूजा पाठ किए बिना कभी भी अन्न ग्रहण नहीं किया था। जब वृद्धावस्था आई तो वह बीमार पड़ गया और अ....
पैसा पाने के लिए पैसा दें
पैसा देना अपने जीवन में ज्यादा पैसा लाने की जबर्दस्त तकनीक है, क्योंकि यह करते समय दरअसल आप कहरहे हैं, “मेरे पास बहुत पैसा है।” हैरानी की कोई बात नहीं....
गणेश संकष्ट चतुर्थी व्रत‬
सभी महीनों की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गणेश संकष्ट चतुर्थी कहलाती है। इसे वक्रतुंडी चतुर्थी, माही चौथ, तिल अथवा तिलकूट चतुर्थी व्रत भी कहते हैं। मंगलमूर्....
भगवान बुद्ध का ‪उपदेश‬
एक बार मगध के व्यापारी को व्यापार में बहुत लाभ हुआ, अपार धन-संपत्ति पाकर उसका मन अहंकार से भर गया। उसके बाद से वह अपने अधीनस्थों से अहंकारपूर्ण व्....
गणेश जी को दूर्वा(दूब) क्यों चढ़ाई जाती है ?
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य के कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राही-त्राही मची हुई थी। अनलासुर ऋषि-....
शिक्षाप्रद कहानियां - धन का मोह
एक नदी के किनारे एक महात्मा रहते थे। उनके पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं का समाधान पाने आते थे। एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला- महाराज!....
इस बार पूरे विधि-विधान से करें सोमवती अमावस्या की पूजा !
सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या सोमवती अमावस्या कहलाती है। प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है और प्रत्येक सात दिन बाद एक सोमवार। परन्तु ऐसा बहुत ह....
जानिए क्यों की जाती है मंदिर की परिक्रमा तथा क्या है इसका महत्त्व ?
ईश्वर की आराधना करने के तरीके अनेक हैं, इसमें पूरे विधि-विधान से पूजा करने से लेकर उपवास रख कर भी ईश्वर को प्रसन्न करने जैसी रीति है। लेकिन इसके ....
चांद- खिलौना
एक दिन की बात है। यशोदा मैया गोपिओं के साथ कान्हा की बाल-सुलभ लीलाओं की चर्चा कर रही थीं। खेलते-खेलते अचानक कन्हैया की दृष्टि चन्द्रमा पर पड़ी। उ....
सुख-संतोष की देवी है मां संतोषी
सुख-संतोष की देवी मां के पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि हैं। रिद्धि-सिद्धि धन, धान्य, सोना, चांदी, मूंगा, रत्नों से भरा परिवार होने के कारण इन्ह....
जानिए किन चार तरह के व्यक्तियों को नींद नहीं आती
"महाभारत" की कथा के महत्वपूर्ण पात्र विदुर को कौरव-वंश की गाथा में विशेष स्थान प्राप्त है। विदुर हस्तिनापुर राज्य के शीर्ष स्तंभों में से एक अत्य....
मर्यादा पालन क्यों ?
आहार निद्रा भय मैथुन आदि क्रियाएं समस्त जीवों की समान होते हुए भी जो विशेषता मनुष्य को इन सभी से अलग करती है, वह तत्ततकार्य कलाप को विधिवत् सम्पादन कर....
मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप- मां चंद्रघंटा
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
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तो इसलिए पूजनीय है शमी वृक्ष
शमी वृक्ष के पूजन को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। लेकिन शमी वृक्ष के पूजन के पीछे एक वजह यह है भी बताते हैं कि महाभारत के युद्ध में पांडवों ने इसी वृ....
आपका चरित्र ही सबसे बड़ा गुण है।
एक राजा को अपने लिए सेवक की आवश्यकता थी। उसके मंत्री ने दो दिनों के बाद एक योग्य व्यक्ति को राजा के सामने पेश किया। राजा ने उसे अपना सेवक बना तो लिया ....
पूजा-पाठ करने की सही तरीका
शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि पूजा-पाठ, भगवान का मनन करने से उनसे हमारा सीधा संपर्क हो जाता है। जिसके कारण उनकी कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है और हर....
श्रीयंत्र है मां लक्ष्मी को परम प्रिय
मां लक्ष्मी का प्रिय यंत्र है श्रीयंत्र। कहा जाता है कि श्रीयंत्र की पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। घर में विधि-विधान के साथ ....
शादी से समय क्यों लेते है अग्नि के सात फेरे
हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में एक है विवाह संस्कार। इस संस्कार का एक नियम यह है कि जब वर-वधू विवाह मंडप में आते हैं तब पुरोहित ईश्वर को साक्षी मानक....
सरस्वती को वाणी की देवी क्यों कहते हैं?
बसंत पंचमी पर्व का ज्ञान की देवी मां सरस्वती से संबंधित है। मां सरस्वती बुद्धि, ज्ञान व संगीत की देवी हैं। इस दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप ....
मंथरा की कुशिक्षा
बारात के अयोध्या लौटने का समाचार सुनकर अयोध्या वासियों ने अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया। जगह- जगह स्वागत- मंडप बनाए गए। पूरे नगर को ध्वज, तोरण और बंद....
कलियुग का पुनीत प्रताप
कलियुग का एक पुनीत (पवित्र) प्रताप यह है कि इसमें मानसिक पुण्य तो फलदायी होते हैं, परंतु मानसिक पापों का फल नहीं होता । ‘पुनीत प्रताप’ इसलिए कहा गया ....
राधा - भाव
राधा भाव में उपासक और उपास्य में प्रेमाधिक्य के कारण एकरूपता हो जाती है । यही कारण था कि भगवान श्रीकृष्ण राधा जी हो जाते थे और श्रीराधा श्रीकृष्ण बन ....
श्रीकैकेयी और सुमित्रा माता के चरित्र से शिक्षा
भरत माता श्री कैकेयी जी के चरित्रों से प्रकट और गुप्त - दो प्रकार की शिक्षाएं लौकिक तथा पारलौकिक रूपों में मिलती हैं । प्रथम प्रकटरूप में लोकशिक्षा को....
श्रीलक्ष्मण जी के विशेष धर्म से शिक्षा

वनगमन के समय श्रीराम जी ने बड़े प्रेम के साथ लक्ष्मण जी से कहा कि वे अयोध्या में रहकर माता पिता और प्रजा की सेवा करें । भगवान के वचन को सुनकर ....

श्री शबरी जी की भक्ति

सबको परमगति प्रदान करते हुए उदारशिरोमणि भगवान शबरी को भी गति देने के लिए उसके आश्रम में पधारे । ‘आश्रम’ शब्द से शबरी जी का विरक्त होना सूचित क....

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